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गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
०८चारधाम यात्रा

स्तर 4 (L4) के विभिन्न उद्घाटन समारोह

आधुनिक युग में समस्याओं से घिरे मानव को, उसके मन को, उसकी आत्मा को अगर कोई शांत, स्थिर और प्रसन्नचित्त रख सकता है तो वो एकमात्र गीता है। अर्जुन को प्रश्नवाचक चिन्हों के भँवर से गीता उपदेश देकर श्रीकृष्ण ने चक्रव्यूह से बाहर निकाला था। गीता संथा वर्ग के द्वारा भी गीता प्रेम जगा कर गीता ज्ञानरूपी महासागर की इन बूंदों को ग्रहण कराने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस लक्ष्य को सरल बनाने हेतु गीता के अट्ठारह अध्यायों को सरलता से सीखने की दृष्टि से चार स्तरों पर विभाजित किया गया है। लेवल 1 से लेवल 4 तक चार आयाम स्थापित किये गये हैं। इस लंबी सुंदर यात्रा में तीसरे चरण तक प्रशिक्षार्थी गीता के अट्ठारह अध्याय में से बारह अध्यायों का पठन कर चुके होते हैं । चौथे चरण में शेष छह अध्यायों के शुद्ध उच्चारण का प्रशिक्षण दिया जाता है।

चौथे चरण, लेवल 4 में ज़ूम कक्षाओं के माध्यम से अध्याय दो, आठ, दस, ग्यारह, तेरह एवं अट्ठारह का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। ये सभी अध्याय विस्तृत व अर्थ की दृष्टि से गूढ़ अध्याय हैं, इसीलिये पूज्य स्वामीजी ने इनको क्रम दृष्टि से अंत में रखा। गीता पढ़ाने वाले सभी गीतासेवी प्रशिक्षक अत्यन्त धैर्य व सहनशीलता के साथ प्रत्येक विद्यार्थी को शुद्ध उच्चारण के साथ अनुपठन करवाते हैं। प्रशिक्षार्थियों को अध्यायों को कंठस्थ करने की प्रेरणा भी दी जाती है ताकि वह गीता को मुखस्थ व हृदयस्थ कर उससे एकाकार हो जायें। शुद्ध उच्चारण के साथ कंठस्थ होने पर विभिन्न स्तर की परीक्षाओं में अर्थात ‘गीता जिज्ञासु’, ‘गीता पाठक’, ‘गीता पथिक’ की परीक्षाओं में सम्मिलित हो सकते हैं। सभी अठारह अध्याय शुद्ध उच्चारण के साथ कंठस्थ होने पर ‘गीताव्रती’ की परीक्षा भी दे सकते हैं। ‘गीताव्रती’ उत्तीर्ण होने पर उन्हें प. पू. स्वामी जी के करकमलों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्राप्त करने का गौरव और सौभाग्य मिल सकता है। यह सभी परीक्षायें ऐच्छिक, नि:शुल्क व दीर्घकाल तक उपलब्ध हैं यानि कंठस्थ करने में अधिक समय लगे तो भी कोई दिक्कत नहीं, प्रत्येक माह आयोजित होने वाली इन परीक्षाओं में exam.learngeeta.com के माध्यम से कोई भी सम्मिलित हो सकता है।

भगवद्गीता जीवन की हर दशा में दिशा देने का कार्य करेगी। गुरु के सान्निध्य में, साधक भाव, भक्ति भाव व सहज भाव अपने अंतर्मन में लाएं, इन भावों के साथ, हम सबके प्रिय आशू भैया ने मार्च 2021 में लेवल 4 के प्रथम बैच के आरंभ होने की घोषणा की। इस बैच प्रवेश प्राप्त करने वाले 5000 साधकों का अभिनन्दन और स्वागत किया। उन्होंने बताया कि प्रसन्नता से एक-एक चरण पार हुए हम आगे बढ़े हैं।

पहला बैच कुछ माह पूर्व ही तो आरम्भ हुआ था, और देखिये अब वे प्रशिक्षार्थी अपनी यात्रा को बढ़ाते हुए प्रथम L-4 बैच में पहुँच गये हैं, यह बहुत उल्लास की बात है। उन्होंने श्रद्धेय अटल जी की यह पंक्तियाँ दोहराई “कुछ लोग चलते हैं पथ पर, कुछ लोग पथ बनाते हैं”
प्रथम L4 के प्रशिक्षार्थियों ने एक नवीन पथ का निर्माण कर दिया है जिस पर आने वाले समय में लाखों गीताप्रेमी अग्रसर होंगे। आरम्भ में अनुभव भी कम थे, साधन जुटाते हुए सिस्टम बनाते हुए यह नवीन पथ बनाया गया। भगवान साथ थे, उनकी कृपा और स्वामी जी की कृपा से कार्यकर्ता, प्रशिक्षार्थी जुड़ते गये और कारवाँ बनता गया। उन्होंने बताया आज मार्च 2020 में वर्गों की संख्या बढ़ते बढ़ते इतनी आगे पँहुच गयी है कि लगभग 550 प्रशिक्षण वर्ग नित्य आयोजित हो रहे हैं जिसमे नित्य लगभग 40000 साधक लाभ ले रहे हैं। जब कोई यात्रा आरंभ होती है तो उसकी सफलता को लेकर संशय रहता है, लेकिन जब यात्रा का काफी भाग बीत जाता है तो यात्रा पूरी करने की अभिलाषा से पुनः ऊर्जा संचरित हो जाती है।

गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. संजय जी मालपाणी ने कहा हम सब इस गीता यात्रा में आरूढ़ हों, ये अति सुन्दर यात्रा है, चौथे चरण में चलने के लिये लगाम उसके हाथ में देनी होगी, निरहंकार होना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि गीता के सभी श्लोक सबके लिए नहीं हैं। जैसे केमिस्ट की दुकान में रोगी के लिए कौन सी दवा उपयोगी है, यह डॉक्टर बताता है। ऐसे ही गुरु की कृपा से ही गीता के गूढ़ रहस्यों को जान पाना सम्भव होता है। उन्होंने गीता में अर्जुन द्वारा कहे गये पहले और अंतिम श्लोक की भी चर्चा की। प्रथम श्लोक में अर्जुन ने कृष्ण से कहा रथ चलाओ, मेरी बागडोर संभालो, सही जगह ले चलो, यहां अर्जुन निरहंकार हो गए। अंतिम श्लोक में अर्जुन ने कहा मेरे सारे सन्देह मिट चुके हैं। ये सब आपके कृपा प्रसाद से संभव हुआ। गीता ज्ञान पाकर सब लोग उस प्रसाद के अधिकारी बन रहे हैं। भगवान ने हाथ थामा है तो अब चिंता किस बात की।

अत्यन्त ऊर्जावान गीता परिवार की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा व मध्यांचल प्रमुख आ. प्रमिला माहेश्वरी दीदी ने L4 बैच का उद्घाटन किया। श्री संजय भैया ने प्रमिला दीदी का परिचय देते हुए कहा कि वे स्वयं पूरी तरह से समर्पित हैं, अनेकों उपक्रम सहज भाव से करती हैं, हज़ारों बच्चों के साथ योग महोत्सव, गीता महोत्सव करती हैं, प्राणायाम, योगासन के माध्यम से रोग हरती हैं। प्रमिला दीदी ने कहा हम सब को गीता को आचरण में लाना है। उन्होंने कहा अनेक विधाओं को लेकर परिवार काम कर रहा है। बालकों में संस्कारों को जगाना है, नई पीढ़ी को सुसंस्कारी बनाना है। उन्होंने समाज से अंधकार को हटाने के संकल्प के लिए कहा-

अनगिनत दीप जलेंगे ऐसे, तमस एक दिन भागेगा
पौरुष की आहुति से, भाग्य देश का जागेगा

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए आ. आशू भैया ने अतिथियों का स्वागत व परिचय कराया। प्रशिक्षार्थियों व प्रशिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किये, मंतव्य सुने गयें। यहाँ अत्यन्त विलक्षण कार्यकर्ता सुश्री श्रद्धा रावदेव दीदी का परिचय कराया गया। उन्होंने बताया दीदी नित्य नई योजनाओं एवं उनके समाधान के साथ उपस्थित होती हैं, अनेक संस्थाओं की जिम्मेदारी के साथ उत्कृष्ट कार्य करती हैं।

श्रद्धा दीदी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित किया। सर्वप्रथम उन्होंने गीता परिवार के संस्थापक अध्यक्ष प. पू. स्वामी जी को कोटिशः नमन किया। उन्होंने सभी सहयोगियों, ट्रेनर, टेक असिस्टेंट, जी. सी., लर्न गीता टीम, विवेचकों, पीडीएफ निर्माता, क्लास मॉनिटरिंग टीम, एल.एम.एस टीम, कार्यक्रम नियोजक टीम, शेयरिंग टीम, मैसेज ट्रांसलेटर, एडमिशन, विवेचन राइटिंग टीम एवं प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े साधकों का हृदय से आभार प्रकट किया।

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