प्रचलित नववर्ष उत्सव
21वाँ प्रचलित नववर्ष उत्सव 2020, का आयोजन गीता परिवार ने वर्ष के अंतिम दिन अर्थात् 31 दिसंबर 2020 को अति उत्साह से किया। तय किया गया कि, नववर्ष का स्वागत प्रथा के अनुरूप हनुमान चालीसा गायन के द्वारा करेंगे। परन्तु हनुमान चालीसा ही क्यों?
31 दिसम्बर 2020, https://youtu.be/_3ExUaxTX_Y
कुरुक्षेत्र के रणांगण में जब गीताशास्त्र का उपदेश भगवान ने अर्जुन को दिया, तब उसके श्रोता अर्जुन ही नहीं अपितु हनुमान जी भी थे, यही कारण है कि जब भी गीता कक्षाओं का शुभारंभ होता है तब वहां हनुमान जी का स्मरण अवश्यंभावी होता है। हनुमान चालीसा में एक पंक्ति है कि- “राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे”
अर्थात् हनुमान जी, प्रभु श्रीरामजी के द्वार पर खड़े पहरा दे रहे हैं, उनका भजन किए बिना या उनकी आज्ञा लिये बिना किसी का प्रभु तक पहुँचना संभव नहीं है। अत: उनका शुभ स्मरण करके अपने प्रभु तक पहुँचने के लिये हनुमान जी से आज्ञा लेते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
इस कार्यक्रम का आरम्भ आ. आशू भैया ने सभी का स्वागत करते हुए किया एवं नववर्ष के आगमन पर हनुमान चालीसा का पाठ करने की प्रथा के बारे में बताया, यह प्रथा 1997 से गीता परिवार में चली आ रही है। लोगों को नववर्ष आरंभ करने में विकल्प मिले एवं उस दिन की राजसिक चकाचौंध से बचें इस हेतु से इसका आरंभ किया।
तत्पश्चात् श्री अभिनव भैया और श्री गिरिराज भैया ने बड़े सुर ताल में हनुमान चालीसा का भक्तिपूर्ण गायन किया। जूम एप पर 1000 लोग मीटिंग में कनेक्ट हुए थे, बाकी लोगों ने यूट्यूब पर लाभ उठाया।
आ. आशू भैया ने नववर्ष पर लिये जाने वाले संकल्पों पर सबको प्रोत्साहित करते हुए, स्वयं की बुराईयों को छोड़ने के लिये दृढ़संकल्प लेने के लिए कहा। रूपल दीदी ने एक वीडियो के द्वारा “अर्जुन भव” नाटिका के कुछ दृश्य दिखाये। आदरणीय आशू भैया ने सबको नववर्ष की मंगलमय शुभकामना देकर कार्यक्रम का समापन किया ।
