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गीता मैत्री अंक १जून से अक्टूबर २०२१
१५गीता सेवी अनुभव

Learngeeta - निःस्वार्थ सेवा

Learngeeta का कार्य जब आरम्भ हुआ तो इसका स्वरूप इस प्रकार रखा गया कि समाज का प्रत्येक वर्ग इससे जुड़कर अपनी भूमिका निभा सके। बाहर से देखने मे तो यह मात्र अनुस्वार विसर्ग के नियमों के साथ गीता का शुद्ध उच्चारण सीखने का एक साधन दिखता है किन्तु जब सूक्ष्मता से इसका अन्वेषण किया जाता है तो पता चलता है कि यह गीताप्रचार हेतु गीता सैनिक तैयार होने की प्रक्रिया है।

आज पूरे विश्व से लगभग 100 देशों से लाखों लोग हमारे साथ जुड़ गए हैं और इतना बड़ा मैनजमेंट गीता परिवार निःशुल्क कर रहा है। कोई भी किसी भी स्तर में गीता सीखा उससे किसी प्रकार की फीस आदि नही देनी होती है न ही गीता परिवार द्वारा निर्मित किसी सामग्री या ऑनलाइन साइट आदि का कोई चार्ज लिया जाता है।

जिसप्रकार सूर्य अपना प्रकाश एवं ऊष्मा बिना किसी स्वार्थ के चहुँ ओर वितरित करता है, जिस प्रकार चंद्रमा की आभा बिना किसी स्वार्थ के बिखरती है एवं जैसे सिन्धु अपना जल सभी को सुलभता से प्रदान करता है उसी प्रकार गीता परिवार की गीता पठन की कक्षाएं निःस्वार्थ भाव से मात्र सेवारूप में चल रही हैं।

यहां गीता पढ़ाने वाले प्रशिक्षक, गीता कक्षा होस्ट करने वाले तकनीकि सहायक एवं बैकएंड की सभी टीम्स कोई और नही है किंतु गीता सीखने वाले साधक ही अपना अतिरिक्त समय इस कार्य मे सेवा की दृष्टि से दे रहे हैं।

“गीता पढ़े, पढ़ाएं, जीवन मे लाएं” स्वामीजी द्वारा प्रदत्त यह वाक्य आज सभी का ध्येय बनता जा रहा है। गीता पढ़ाने में सहायता होगी, इस हेतु कार्यकर्ताओं को कोई भी कार्य हो वे दिन रात एक पद पर ही तैयार खड़े हैं। ऐसा उत्साह एवं सेवा भाव देखकर कोई पाषाणहृदय ही होगा जो विह्वल न हो।

Leargeeta के माध्यम से यह निःशुल्क सेवा सभी कार्यकर्ताओं की अध्यात्मिक उन्नति हेतु एक तीक्ष्ण साधन का स्वरूप ले रही है। अब तो सभी की बस एक ही धुन है-

**“नर तन है साधन भव सिंधु तर लूँ,
ऐसा समय फिर आये न आये।”**

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मूल अंक, पृष्ठ ६६