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गीता मैत्री अंक ७जनवरी से जून २०२४
गीता भक्ति अमृत महोत्सव
०९गीता भक्ति अमृत महोत्सव

गीता भक्ति अमृत महोत्सव

इंद्रायणी घाट- विशेष कार्यक्रम। परम पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज का 75वाँ अवतरण दिवस - आळंदी।

मृदंगनाद एवं गीता पाठ

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परम पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरिजी महाराज के चरणों में साष्टांग, दंडवत् नमस्कार के साथ इस कार्यक्रम का आरंभ अति मनमोहक, प्रफुल्लित मन से आनंदमयी वातावरण में किया गया। इस कार्यक्रम का सूत्रसंचालन हमारे आदरणीय, अतिप्रिय गीता परिवार के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष एवं लर्नगीता के कार्यक्रम संचालक, डॉ आशू गोयल जी लखनऊ द्वारा किया गया।

जय जय राम कृष्ण हरि, जय जय राम कृष्ण हरि के गीत के साथ परम पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज का पुष्पों से स्वागत किया गया। परम पूज्य स्वामी जी ने मंच पर विराजित होकर मंच को सुशोभित किया।

आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोटा से एलन (ALLEN) इंस्टिट्यूट के संचालक श्रीमान गोविंद जी महेश्वरी का मंच पर स्वागत किया गया। आदरणीय आशू भैया जी ने मंच पर पधारे परम पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरिजी महाराज से, आदरणीय गोविंद महेश्वरी जी से, डॉ. विश्वास सर जी से, भगवद् पूजा हेतु प्रार्थना की तथा श्री भगवान

का विधि विधान से, मंत्रों से पूजन किया गया। श्रीमान संदीप पंत जी, श्रीमान गिरधर जी काले भी प्रतिमा पूजा में सम्मिलित हुए। परम पूज्य स्वामी जी, श्रीमान थोरात जी ने भगवान राम जी का पूजन व वंदन किया।

"श्री राम जय राम जय जय राम। श्री राम जय राम जय जय राम।।"

इस गुणगान से सम्पूर्ण घाट गुंजायमान था, सम्पूर्ण वातावरण श्री राम में लिप्त था। तदुपरांत परम पूज्य स्वामी जी का सत्कार किया गया। संतों का पूजन किया गया। कार्याध्यक्ष श्रीमान काले जी, श्रीमान गोविंद जी महेश्वरी, डॉ. कराड सर जी, श्रीमान काले जी सभी ने मनोभाव में संतों का पूजन किया। आज के इस गीता पाठ के कार्यक्रम के मुख्य आदरणीय यजमान श्री गोविंद जी महेश्वरी, ज्योति प्रसाद जी, उर्मिला जी तापड़िया जी आदि सभी का अभिनंदन स्वागत और सत्कार किया गया।

गीता भक्ति अमृत महोत्सव के कार्याध्यक्ष श्रीमान गिरधर जी ने स्वामी जी को माल्यार्पण कर कार्यक्रम का आरंभ किया। आदरणीय हरि नारायण व्यास जी ने श्रीमान कराड जी का सम्मान किया। सभी मंच पर विराजित पदाधिकारी का कार्यक्रम में स्वागत किया गया। इस कार्यक्रम का प्रास्ताविक बताते हुए सभी का स्वागत हुआ इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में गीता परिवार के पश्चिमांचल प्रभारी श्री गोविंद जी माहेश्वरी जी उपस्थित रहें। उनका भी स्वागत दामोदर दास जी मारू द्वारा किया गया। इस विश्वरूप दर्शन मंच जिसको विश्व शांति केंद्र कहा गया इसका निर्माण विश्वनाथ कराड जी द्वारा किया गया। 11,111 बालक गीता पाठ हेतु एवं 1,111 बालक मृदंग नाद हेतु शोभायमान हुए। इस सुंदर आयोजन हेतु आदरणीय कराड जी का हृदय की गहराइयों से धन्यवाद दिया गया।

आगे इस कार्यक्रम की सूत्र धारिका महीनों से जिन्होंने इस कार्यक्रम का प्रचार किया, इसकी तैयारी की, आज के कार्यक्रम को मूर्त रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गीता परिवार की अत्यंत वरिष्ठ कार्यकर्ता मध्यांचल प्रभारी जिनका पूरा जीवन परम पूज्य स्वामी जी के सेवा में आहूत है और बालकों की सेवा में आहूत हैं, योग एवं प्राणायाम जीवन के सूत्र है। ऐसी कर्मठ कार्यकर्ता प्रमिला जी माहेश्वरी ने स्वामी के बारे में कुछ शब्द कहे। सभी का धन्यवाद किया। आ. प्रमिला जी ने श्री कृष्ण जी की प्रार्थना की और कार्यक्रम में तेज उद्घोष किया।

योगेशं सच्चिदानंदं वासुदेवं व्रजप्रियम्।
धर्म संस्थापकं वीरं कृष्णं वंदे जगतगुरुम्॥
नमामि सद्गुरुम शांतम्, सच्चिदानंद विग्रहम्।
पूर्ण ब्रह्म परमानंदम्, ईश मालंदी वल्लभम्॥

कैवल्य चक्रवर्ती, सम्राट भगवान ज्ञानेश्वर महाराज

के इस पावन धरती पर माउली के परम पावन चरणों में प्रमिला जी माहेश्वरी ने कोटि-कोटि प्रणाम किया। सभी ने प. पू. स्वामी जी को प्रणाम किया। यह गीता भक्ति अमृत महोत्सव परम पूज्य स्वामी जी का 75वाँ अवतरण दिवस है। जो हम सभी मिलकर गीता भक्ति अमृत महोत्सव नाम से मना रहे हैं। यह एक उत्सव है। यह एक त्यौहार है। स्वामी जी का जीवन गीतामय है। जो भी गीता जी को जन-जन तक पहुँचाता है वह उनका अत्यंत प्रिय हो जाता है। यह गीताभक्ति दिवस आज राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। हमारे आ. आशू भैया जी अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष इन्होंने 180 देशों में गीता जी को पहुँचाया है। गीता जी हमारी संस्कृति का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। गीता वेदों का सार है इसलिए हम स्वामी जी का जन्म दिवस गीताभक्ति अमृत महोत्सव के रूप में मना रहे हैं। आलंदी में गीता परिवार का कार्य योग सिखाने से, गुरुकुल में गीता ज्ञान देने से आरंभ हुआ। उसके पश्चात् वेदश्री तपोवन में अनेक शिविरों को करते-करते यह कार्य बढ़ता गया। इस कार्य ने अब विराट रूप ले लिया है। मन प्रसन्न है, आनंदित है। एक छोटा सा पौधा विशाल वृक्ष बन गया है, विशाल रूप धारण कर चुका है।

आज स्वामीजी के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य पर 12वें व 15वें अध्याय का गीता पाठ करके सभी गीता साधकों ने गीता गाकर भेंट दी। भगवान ज्ञानेश्वर महाराज की कृपा से यह भव्य रूप गीता परिवार का देखने को मिला। गुरुकुल के संचालकों का इस कार्यक्रम में संचालन हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया गया, गीता परिवार को और भी विराट रूप, विश्वरूप देना है। भगवान ज्ञानेश्वर महाराज की कृपा से स्वामी जी के आशीर्वाद से गीताभक्ति अमृत महोत्सव कार्यक्रम के कार्याध्यक्ष श्री गिरधारी जी तथा राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष, गीता विशारद संजय जी मालपाणी जी की प्रेरणा से, सहयोग से सारा कार्य आरंभ हुआ एवं गुरुकुल के बालकों ने बहुत सहयोग भी दिया। सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई, सभी को कार्यक्रम के संचालन हेतु प्रणाम किया गया।

भारत माता की जय...वंदे मातरम् .....वंदे मातरम् का गान निरंतर चल रहा था। आगे आ. आशू भैया जी ने कार्यक्रम की प्रस्तुति का विवरण दिया और गीता परिवार की अत्यंत वरिष्ठ कार्यकर्ता स्वर कोकिला

आ. सुवर्णा मालपाणी जी, गीता प्रवीण ज्योति शुक्ला जी, गीता प्रवीण रुपल शुक्ला जी, गीता प्रवीण कविता वर्मा जी द्वारा सभी के सहयोग से 12वें तथा 15वें अध्याय का पठन किया गया। मंच पर उपस्थित सभी वरिष्ठ उपस्थित साधकों, गुरुकुल के बालकों द्वारा बहुत ही सुंदर 12वें और 15वें अध्याय के संपूर्ण श्लोक भक्तियोग, पुरुषोत्तमयोग का प्रस्तुतिकरण अति मनमोहक, मधुर आवाज में आनंदित मधुर बंसी की तरह, कृष्णभक्ति में लीन होकर हुआ।

सभी ने एक साथ गीता गायन किया। प. पू. राजेंद्र दास जी महाराज का स्वागत आ. श्री गोविंद जी महेश्वरी ने किया।

गीत प्रस्तुतिकरण:

जब संत मिलन हो जाए, तेरी वाणी हरी गुण गाए।
जब संत मिलन हो जाए, तेरी वाणी हरी गुण गाए।
तब इतना समझ लेना, अब हरी से मिलन होगा॥

नहीं क्रोध किसी पे आए, सब में तो नज़र हरी आए।
तब इतना समझ लेना, अब हरी से मिलन होगा॥

आँखों से आंसू आए, दिन रात याद हरी आए।
कोई दूजा ना मन को भाए, दर्शन को मन ललचाए॥
तब इतना समझ लेना, अब हरी से मिलन होगा।

इस सुंदर गायन के पश्चात् पधारे संतों का आशीर्वाद सभी को प्राप्त हुआ। हरि भक्त नारायण जी, कैलास गायकवाड जी, अंकुश महाराज जी, विट्ठल गवांदे बाबा जी, शिव हरी जी, गायकवाड जी, शांताराम महाराज जी आदि सभी संतो का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। सभी का सम्मान पुष्प माला से किया गया। मंच पर विराजित अतुल्य सभी संतो का आभार व्यक्त किया गया एवं स्वामी जी का आशीर्वाद सभी भक्तों को प्राप्त हुआ।

अब आगे कार्यक्रम में इतनी सुंदर मृदंगनाद की बारी

थी एवं सभी आतुर भाव के साथ प्रतीक्षा में थे। हमारे गुरुकुल के 1,111 बालकों द्वारा सुंदर मृदंगनाद किया गया।

मृदंगनाद:

विट्ठल विट्ठल जय हरी विट्ठल,
विट्ठल विट्ठल जय हरी विट्ठल।
पंढरीनाथ महाराज की जय। श्री हरि की जय।
सद्गुरु स्वामी की जय।
स्वामी गोविंद देव जी महाराज की जय।
विट्ठल विट्ठल जय हरी विट्ठल,
विट्ठल विट्ठल जय हरी विट्ठल।

इसका गान हुआ। पूरा वातावरण कृष्णमय था। अद्भुत दृश्य था जो आंखों में संपूर्ण जीवन विद्यमान होगा। इतना सुंदर बालकों को गुरुकुल में तैयार किया गया है। इंद्रायणी घाट पर सुंदर आकर्षित दृश्य मानो ऐसा लग रहा था कि साक्षात् भगवान श्री हरि पधारे हों। इतना सुंदर दृश्य जीवन में सर्वप्रथम देखने को सौभाग्य प्राप्त हुआ। एक स्वर, एक ध्वनि, एक गुंजन, तार प्रभु से कुछ इस तरह जुड़ गए थे मानो भगवान साक्षात् सामने विराजमान हो। सभी संतों एवं स्वामी जी हरि रूप में विराजमान थे। मृदंग वादन का दृश्य अद्भुत था जो कि जय हरि विट्ठल के भजन के साथ हुआ। स्वामी जी के अवतरण दिवस पर यह अद्भुत वातावरण को अनुभव किया। एक स्वप्न जैसा लग रहा था।

परम पूज्य स्वामी जी भक्ति रस में डूबे हुए थे।

तुकारामsssss ज्ञान दीप, तुकारामsssss तुकाराम का कीर्तन हुआ।

पूरा इंद्रायणी घाट, परिसर भजन कीर्तन से गुंजायमान था, भजन कीर्तन से सम्पूर्ण वातावरण भक्ति रस से डूबा हुआ था। अत्यधिक मात्रा में लोगों की उपस्थिति थी। परमपूज्य स्वामी जी के दर्शन साधकों ने कियें। सभी संतो के दर्शन सभी ने किये। संपूर्ण व्यवस्था बहुत ही अच्छी थी एवं संतों की उपस्थिति में कार्यक्रम अद्भुत रहा। सभी को संतों की वाणी सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ एवं स्वामी जी की 75वीं वर्षगाँठ पर इंद्रायणी घाट पर दीप प्रवाहित किए गए। दीपावली जैसा अनुभव हुआ। सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।स्वामीजी द्वारा घाट की आरती की गई। सभी साधकों ने आनंद की अनुभूति की। आ. संजय भैया जी मालपाणी, आ. आशू भैया जी गोयल ने कार्यक्रम को पूर्णरूप से संभाला। यह अद्भुत एवं कठिन कार्य था जिसको पूर्णनिष्ठा, निपुणता के साथ निभाया गया। स्वामीजी के दर्शन हेतु साधकों की भीड़ उमड़ चुकी थी, इस प्रकार से

संपूर्ण कार्यक्रम अद्भुत रहा। उपस्थित सभी अतिथिगण, विद्यार्थीगण, गीता परिवार साधक सभी को बहुत-बहुत बधाई दी गई ।

धन्यवाद ज्ञापित करते हुए स्वामी जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इस प्रकार कार्यक्रम का समापन किया गया।

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