मेरे राम
दीप प्रज्वलन एवं पावन भिक्षा के सुमधुर गायन के साथ रामनवमी का विशेष विवेचन सत्र "मेरे राम" का शुभारंभ हुआ।

(रामनवमी के पावन अवसर पर एक विशेष सत्र)
गीता विशारद डॉ आशू जी गोयल
बुधवार, 24 April 2024 सायं 7.00 बजे से
भारत पर्वों की भूमि है। हमारी संस्कृति प्रसन्नता को आत्मसात् करने वाली है। नित्य कोई अवसर आता ही है जब हम उत्सव मनाते हैं। आज का दिन तो विलक्षण है, मधुर भावपूर्ण, कल्याणकारी भक्ति परक और समाज को चारित्रिक दिशा देने वाला यह ऐतिहासिक दिन है। ऐतिहासिक और सामयिक होने के साथ सर्वकालिक भी है। तीनों ही दृष्टि से विचार करते हैं। विजया गोड़बोले ताई के मधुर स्वर में पावन भिक्षा कविता का आनन्द लिया।राम राम जय राजाराम। पावन भिक्षा दे दो राम॥ कोमल वाणी दे दो राम निर्मल करणी दे दो राम । प्रासंगिक मति दे दो राम । चतुराई भी दे दो राम ॥1॥ हितकारक जो दे दो राम । जनसुखकारक दे दो राम। इंगितज्ञता दे दो राम । बहुजन मैत्री दे दो राम॥2॥ विद्या वैभव दे दो राम । उदासीनता दे दो राम। अयाचना व्रत दे दो राम। मैं न जानु वह दे दो राम॥3॥ प्यार तुम्हारा दे दो राम । दास कहे मोहे दो श्रीराम। संगीत गायन दे दो राम । गान मधुरता दे दो राम॥4॥ सावधानता दे दो राम । ज्ञान कंठगत दे दो राम। दास कहे हे सद्गुणधाम । उत्तम गुण मोहे दे दो राम॥5॥ पावन भिक्षा दे दो राम । दीन दयालो दे दो राम। अभेद भक्ति दे दो राम । आत्मनिवेदन दे दो राम॥6॥ तन्मयता मोहे दे दो राम । अर्थारोहण दे दो राम। सज्जनसंगति दे दो राम । अलिप्तता मोहे दे दो राम॥7॥ ब्रह्म अनुभव दे दो राम। अनन्य सेवा दे दो राम। पूर्ण समर्पण दे दो राम । दास कहे मोहे दे दो राम॥8॥
सामान्यतः तीन प्रकार के आनन्द इस संसार में अनुभव होते हैं।
1- विषयानन्द - विषयों का भोग करने से प्राप्त हुआ आनन्द, जैसे अच्छा देखना, अच्छा सुनना, अच्छा खाना। 2- वासनानन्द - वासनाओं के विचार करके मन ही मन में होने वाला आनन्द। ऐसा करेंगे, वैसा खाएँगे, वहां जाएँगे। चिन्तनमात्र से आनन्दित होना।
3- आनन्द - विषयों के आनन्द और वासनाओं के आनन्द से अलग होना, आनन्द है।
श्रीराम का नाम तो आनन्द से भी ऊपर, परमानन्द है। तुलसीदास जी कहते हैं कि श्रीराम का नाम सुख का सिन्धु है। हमने पढ़ा है कि पृथ्वी का इकहत्तर प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है। इस माप में जल की यह मात्रा क्षेत्रफल के रूप में आङ्कलित की गयी है। समुद्र की गहराई बारह किलोमीटर तक है। आयतन की तुलना हेतु तो इस गहराई की गणना करके घनीभूत करना आवश्यक है, जैसे कमरे का आयतन करते हैं। आनन्द को घनीभूत करना।
मन की शान्ति तक जिसने जितनी कीमत की वह उतना ही अधिकारी होता है। हम स्वयं का मूल्याङ्कन करें कि हमने भगवान का मूल्याङ्कन क्या किया है। राम नाम की कीमत तुम कितनी कर पाते हो वो तुम्हारी योग्यता है। अब ये राम हैं क्या? एक राम नाम ऐतिहासिक है।
|| ऐतिहासिक राम ||
कबीरदास जी कहते हैं –
एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट घट में लेटा।
एक राम है जगत पसारा, एक राम है जगत से न्यारा॥
भारत की प्राचीन संस्कृति और आधुनिक संस्कृति में कोई कवि यदि राम पर न लिख पाए, तो वह अपनी कलम को अधूरा मानता है। आश्चर्य की बात है कि जितना रामजी के विषय पर लिखा गया, उतना श्रीकृष्ण जी, विष्णु जी, शिवजी पर नहीं लिखा गया है।
श्रीराम पर और रामकथा पर सबसे अधिक ग्रन्थ लिखे गये हैं। केवल उत्तर भारत में ही नहीं ये सर्वत्र हैं। हिन्दी में ग्यारह, मराठी में आठ, बांग्ला में पच्चीस, तमिल में बारह, तेलुगु में बारह, उड़िया में छः आधिकारिक रूप से उपलब्ध हैं। संस्कृत, मलयालम, अरबी, कन्नड़, फारसी, उर्दू सभी भाषाओं में हैं। इण्डोनेशिया की भाषा मलय में, आयरलैण्ड में थाई भाषा में भी रचना हुई है।
महाकवि कालिदास, महाकवि भास क्षेमेन्द्र भवभूति, सोमदेव, समर्थ स्वामी रामदास, ऐसे चार सौ से भी अधिक कवियों ने अलग-अलग भाषाओं में भगवान श्रीराम पर कोई न कोई कथानक या रामायण के दूसरे पात्रों के सम्बन्ध में रचनाएँ की हैं। करपात्री जी महाराज जैसे श्रेष्ठ आधुनिक सन्त ने रामायण मीमांसा की रचना की है।
विभिन्न रामायण वाल्मीकि रामायण और तुलसी रामायण हम यह दो ही जानते हैं, किन्तु अनेक रामायण हैं। अद्भुत रामायण, कृतिरामयण, कुछ रामायण, सर्वार्थ रामायण, तत्त्वार्थ रामायण, बिलङ्का रामायण, प्रेम रामायण, संजीवनी रामायण, उत्तर रामचरितमानसम्, रघुवंशम्, कम्ब रामायण, अध्यात्म रामायण, राधेश्याम रामायण, वीर रामायण, आठ काण्ड रामायण, मानस अनुक्रमणिका, अपराजिता, साकेत, मानस मंथन, श्रीराम चरित, मानस सुमित्रा, तमिल, मानस पीयूष -
सप्त खंड, श्रीराम कथामृत (प.पू. स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज
|| सामयिक राम ||

राम कौन हैं? अयोध्या में जन्मे राम, कौशल्या के राम या वे राम जिनका नाम पैंतीस बार गुरु ग्रन्थ साहिब में आया है, त्रेता के राम, दशरथ के बेटे राम या जिन राम के बारे में कबीर कहते हैं-
राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट। अंत समय पछताएगा जब प्राण जाएंगे छूट।।
या वे राम जिनको अन्तिम समय में पुकारते हैं- “राम नाम सत्य है” या वे राम जिनके लिए महर्षि वाल्मीकि कहते हैं- “रामो विग्रहवान धर्म:”
वे साक्षात धर्म के विग्रहस्वरूप हैं। तुलसीदास जी ने राम के विग्रह से भी अधिक राम नाम को महत्व दिया और प्रश्न खड़ा किया कि नाम बड़ा है या रूप? यह प्रश्न बड़ा प्रसिद्ध है। रामचरितमानस में यही प्रश्न ऋषि भारद्वाज ने याज्ञवल्क्य से और माता पार्वती ने शिवजी से किया है। निर्गुण और सगुण के बीच राम नाम चतुर दुभाषियो के रूप में है जो दोनों का पता बता देता है इसलिए राम नाम का गुणगान करना चाहिए। दशरथ नन्दन सगुण साकार या निर्गुण निराकार में भी अधिक अन्तर नहीं करना चाहिए-
ब्रह्म से भी ब्रह्म का नाम बड़ा है और वह देवताओं को भी वर देने वाला है - ब्रह्म राम तें नामु बड़ बर दायक बर दानि।
|| सर्वकालिक राम ||
राम का चरित्र जीवन में अलग-अलग क्षेत्र में कैसे उपयोगी है? उसको देखना चाहिए। इसे कुछ बिन्दुओं में देख सेकते हैं -
1. बालकों के आदर्श भगवान श्रीराम
2. भ्रातृ आदर्श भगवान श्रीराम
3. चरित्रवान राम
4. आदर्श पुत्र राम
5. भक्त वत्सल राम
6. मित्र राम
7. शरणागत के आश्रय राम
8. शत्रु हितचिंतक राम
9. प्रजा के राम
10. मेरे राम

एक श्लोकी रामायण आदौ राम
तपोवनादि गमनं(म्),
हत्वा मृगं(ङ्) कांचनम्।
वैदीहीहरणं(ञ्)
जटायुमरणं(म्),
सुग्रीवसंभाषणम्॥
बालीनिर्दलनं(म्)
समुद्रतरणं(लँ),
लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्,
एतद्धि रामायणम्॥
नित्य रामजी का जीवन अपनी पूजा में लेकर आएँ। राम कथा का थोड़ा ही सही नित्य पाठ करें। वाल्मीकि रामायण या अन्य राम कथा सम्बन्धी काव्य का थोड़ा-थोड़ा ही सही नित्य पाठ करें। रामजी का चरित्र मेरे जीवन में कुछ-कुछ रोज आए तो अपनी मति अपने आप ही सुमति होती जाएगी; अपना चरित्र अपने आप ही चरित्रवान होता जाएगा और अपनी दृष्टि अपने आप ही भगवान की ओर बढ़ने वाली भक्ति-दृष्टि हो जाएगी। नामजप का सङ्कल्प लें और - सिया राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥
समस्त संसार को भगवान श्रीराम और जगत् जननी भगवती सीतामय जानकर हम सब में भगवान के दर्शन कर सकें इस रामनवमी पर यही प्रार्थना करते हुए पूज्य गुरुदेव गोविन्ददेव गिरि जी महाराज को समर्पित करते हुए 'हरि शरणम्' सङ्कीर्तन के साथ आज के चिन्तन सत्र का समापन हुआ।





