L3 Opening Ceremony

16th Batch - Sep23
12/01/24
गीता परिवार के पारम्परिक भक्ति गीत एवं हरि-नारायण संकीर्तन के साथ ही श्री हनुमान चालीसा गायन के पश्चात् सुश्री गायत्री सिंह दीदी के सुन्दर सूत्र संचालन के साथ स्तर-3 के 16वें बैच का शुभारंभ समारोह आरम्भ हुआ। कार्यक्रम का आरंभ प्रार्थना से उडुपी से कस्तूरी के. दीदी ने अपने मधुर स्वर में की। सुंदर दीप प्रज्वलन जामनगर से विजय के. पण्ड्या भैया द्वारा किया गया।
गीता परिवार के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आदरणीय आशू गोयल भैया ने दो धामों की यात्रा पूर्ण करने पर स्तर 2 के साधकों को अनेकानेक शुभकामनायें दीं। भैया ने स्तर 3 में प्रवेश करने पर साधकों को अत्यंत प्रेरणादायक मार्गदर्शन देते हुए उनका स्वागत किया। आदरणीय आशू भैया ने 12 जनवरी को शुभारम्भ समारोह के सुअवसर पर बताया कि अब से 161 वर्ष पूर्व 12 जनवरी ईस्वी सन् 1863 को मकर संक्रांति के दिन भारतवर्ष की देवभूमि पर बंगाल में स्वामी विवेकानंद जी का अवतरण हुआ था। उनके ओजपूर्ण व्यक्तित्व का युवाओं पर बहुत प्रभाव पड़ा।
आदरणीय आशू भैया ने बताया कि परम पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज ने जब 36 वर्ष पूर्व गीता परिवार की स्थापना की उस समय उन्होंने गीता परिवार हेतु 5 सीमायें निर्धारित कीं, जिन्हें पञ्चसूत्री कहा जाता है।
प्रथम सूत्र भगवद्भक्ति क्योंकि भगवान की मौलिक भक्ति जब हमारे किसी भी कार्य के मूल में रहती है तो वह कार्य सेवा बन जाता है। द्वितीय सूत्र भगवद्गीता
अर्थात् अर्जुन की भांति समरांगण जैसी कठिन परिस्थिति आ जाने पर निर्णय लेने हेतु जैसा भगवान श्रीकृष्ण ने गीता जी में अर्जुन को उपदेश किया था। उस प्रकार निर्णय ले पाने हेतु विस्तृत दृष्टिकोण निर्माण हमारे युवाओं में कर पाने की क्षमता विकसित करना गीता परिवार की स्थापना का महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा।

तृतीय महत्वपूर्ण सूत्र भारतमाता। हमारे प्रत्येक कार्य के निरूपण का उद्देश्य यही हो जिससे देश विदेश में भारत की गौरव पताका लहराये। देशभक्ति सभी कार्यों का आधार होनी चाहिये।
चतुर्थ सूत्र है विज्ञानदृष्टि। गीता परिवार अंधविश्वास को समाप्त करने की प्रेरणा करता है।
पंचम सूत्र 'स्वामी विवेकानंद जी के आदर्श' है। जिनके जीवन के मूल में गीता जी, श्वासों में भारत माता का गौरव, ओजपूर्ण वाणी में सदैव भारत माता के युवाओं को जगाने की गूँज रही ऐसे सन्न्यासी स्वामी विवेकानन्द जी को गीता परिवार का पाँचवा सूत्र मानकर गीता परिवार के सभी कार्यों का निर्धारण किया जाता है। स्वामी विवेकानंद जी के साथ श्रीमद्भगवद्गीता सदैव रही। उन्होंने एक बार एक पत्र में लिखा -
"Please read the Gita every day to the best of your opportunity.”
शिकागो 1893 के धर्म-सम्मेलन का मौलिक उद्देश्य ईसाई धर्म की प्रतिस्थापना करना था। विश्व के सभी धर्मावलम्बियों को बुलाकर उनके सम्मुख ईसाई धर्म को सभी धर्मों से श्रेष्ठ प्रतिपादित करना इस धर्म सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था। किन्तु अद्भुत घटना ऐसी हुई कि शिकागो की विश्व धर्म सभा में जैसे ही स्वामी विवेकानंद जी का भाषण प्रारंभ हुआ संपूर्ण कार्यक्रम का परिदृश्य ही परिवर्तित हो गया। जब तक स्वामी विवेकानंद वहाँ रहे तब तक मात्र स्वामी जी के ओजस्वी भाषण एवं स्वामी जी का तेजस्वी व्यक्तित्व ही विश्व धर्म सभा का मुख्य आकर्षण बन गया तथा पश्चिम में सनातन का सूर्य उदय हो गया ।
स्वामी विवेकानंद जी का प्रिय वाक्य जो कठोपनिषद् से लिया गया है :
'उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत’
स्वामी विवेकानंद जी कहते थे गीता जी वीरों का शास्त्र है तथा शौर्य का शास्त्र है। वे कहते थे -
"Arise, awake, and stop not till the goal is reached."
आज के समय में कितनी प्रासंगिक बात है जब समय है लगभग 500 वर्षों के अनगिनत बलिदानों के उपरांत भव्य राम मंदिर के पुनर्स्थापना भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा का हम बहुत भाग्यशाली पीढ़ी हैं जो इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बनेंगे जब अयोध्या जी में रामलला विराजेंगे।
आज स्तर 3 में प्रवेश के सुअवसर पर आप सभी यह ध्यान रखिये कि गीता जी केवल पारायण का शास्त्र होकर न रह जाए अपितु प्रत्येक व्यक्ति उसका विवेचन सुनें उसे ग्राह्य करें एवं श्रीमद्भगवद्गीता जी में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के दिये सूत्रों को समझें तथा जीवन में उतारने का प्रयत्न करें। आज स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिवस पर यह सुनिश्चित करें कि गीता परिवार के इस निष्काम यज्ञ में अपनी नि:स्वार्थ सेवा की आहुति निरंतर देते रहेंगे।
आदरणीय आशू भैया ने आज स्तर 3 के शुभारम्भ पर अपने स्वागत संभाषण में साधकों से निवेदन किया कि वे गीता परिवार के 5 मूल सूत्रों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। गायत्री सिंह दीदी ने आदरणीय आशू भैया के अत्यंत रोचक एवं प्रेरणादायक मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसके पश्चात् आज के प्रात्यक्षिक कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ जिसका सुंदर आकर्षण रहा साधकों के द्वारा गीता का शुद्ध कंठस्थीकरण एवं गीता विचक्षण के साधकों की विलक्षण प्रतिभा श्लोकांक से श्लोक गायन!
गीता पथिक 1 3 वर्षीय कुमारी यशिता आनंद चाणक्य दीदी ने अपनी कंठस्थीकरण प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया।
पुणे महाराष्ट्र से गीताव्रती 82 वर्षीय हेमलता नागर दीदी सभी के लिए प्रेरणा हैं इन्होंने सुंदर उच्चारण के साथ श्लोक सुनाकर सभी को आनंदित कर दिया। मैंगलोर कर्नाटक से 9 वर्षीय आराध्या एवं 13 वर्षीय अभिज्ञा दोनों गीताव्रती बहनें भी समारोह में उपस्थित रहीं, इन्होंने भी कंठस्थीकरण का सुंदर प्रदर्शन किया। कैंटन यू.एस.ए. से इंदु शर्मा दीदी गीताव्रती होकर विचक्षण की तैयारी कर रही हैं। इन्होंने श्लोकांक से श्लोक सुनाकर सभी श्रोताओं को हतप्रभ कर दिया।
अनेक साधकों ने गीता परिवार से जुड़ने के पश्चात् उनके जीवन में आये सुखद परिवर्तन एवं अनुभव साझा कर सभी को आनंदित कर दिया। आदरणीय आशू भैया ने अत्यन्त महत्वपूर्ण आनंददायक सूचना दी जो कि फरवरी में दिनांक 4 से दिनांक 11 तक पुणे में श्रद्धेय स्वामी श्रीगोविन्ददेव गिरिजी महाराज के 75वें जन्मदिवस के निमित्त आयोजित किये जाने वाले अमृत महोत्सव के निमित्त थी।
हमारी गीता कक्षाओं में प्रतिदिन नये सोपान जुड़ते जाते हैं इसी विषय में आदरणीय आशू भैया ने सुखद बात बतायी कि हमारे लर्नगीता कार्यक्रम में इस बैच में 20% साधक तेलुगु भाषा के हैं। इस प्रकार हिन्दी व अंग्रेजी के पश्चात् तेलुगु भाषा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है।
सभी साधकों ने अपने - अपने मनोगत एवं उनके जीवन में हुए अद्भुत अनुभव साझा कर आनंद का अनुभव किया। इसके पश्चात् गायत्री सिंह दीदी ने धन्यवाद ज्ञापन हेतु अनुपमा पाटिल दीदी को आमंत्रित किया जो कि फरवरी 2020 से गीता परिवार से जुड़ी हैं एवं विविध सेवायें भी प्रदान कर रही हैं। इनके द्वारा अत्यंत हर्षपूर्वक परम श्रद्धेय स्वामी श्रीगोविन्ददेव गिरिजी महाराज के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये। उन्होंने गीता परिवार के विश्वस्तरीय प्रकल्प की नानाविध विशेषताओं का वर्णन करते हुए गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. श्री संजय भैया मालपाणी जी का, अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष श्री डॉ. आशू जी गोयल भैया का एवं प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से गीता परिवार की सेवा में लगे सभी साधकों का हार्दिक अभिनन्दन किया।
कार्यक्रम का समापन प्रार्थना के साथ राजस्थान बीकानेर से सुश्री राधिका विजय दीदी द्वारा हुआ।
॥ॐ श्रीकृष्णार्पणमस्तु॥




