
L1 Opening Ceremony (30th Batch - Jan24)
विभिन्न शुभारम्भ समारोह
L1 Opening Ceremony
30th Batch - Jan24
05/01/24
परम श्रद्धेय स्वामी श्री गोविंददेव जी महाराज को भावपूर्ण नमन करते हुए हमारे गीता परिवार के अन्तरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आदरणीय डॉ. आशू जी गोयल भैया ने सभी को प्रेम एवं उत्साह से संबोधित करते हुए एवं स्तर 1 के साधकों का आनन्दपूर्वक अभिनन्दन करते हुए कहा कि हमने गीता जी को नहीं चुना अपितु गीता जी ने हमें चुना है। भगवान वेदव्यास जिन्होंने स्वयं गीता जी के श्लोकों का संपादन किया एवं अनेकों ग्रंथ लिखे वे स्वयं गीताजी की महिमा में कहते हैं- "गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यै: शास्त्रविस्तरै:। या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनि:सृता॥" अर्थात् गीता जी को पढ़ लिया तो अन्य शास्त्र के अध्ययन की क्या आवश्यकता? गीता तो स्वयं भगवान कृष्ण के मुख से उद्भासित हुई है अपने आपमें परिपूर्ण हैं। गीता जी के 18वें अध्याय के 68वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है - "य इमं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति। भक्ति मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशय:॥" अर्थात् 'मुझमें पराभक्ति से आश्रय करके जो इस परम गोपनीय संवाद (गीताग्रंथ) को मेरे भक्तों में कहेगा, वह मुझे ही प्राप्त होगा इसमें कोई संशय नहीं है।'
यह ईश्वर की कृपा है, हमारे पुर्नजन्म के सुकृत हैं अथवा हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद है जो हमें गीता पढ़ने का सौभाग्य मिला। निश्चय ही हमारे पुण्योदय हुए हैं। परम श्रद्धेय स्वामी श्रीगोविंददेव गिरिजी के आशीर्वाद से 1986 में गीता परिवार की स्थापना हुई जो आज विशाल वट-वृक्ष का रूप लेता जा रहा है। आदरणीय आशू भैया ने गीता परिवार की संपूर्ण कार्य प्रणाली के विषय में साधकों को बताया। अमेरिका से गीताव्रती हेतल पटेल दीदी ने
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प्रार्थना से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आदरणीय संजय मालपाणी भैया ने आज के विशेष अतिथि पूज्य संत श्री सुधांशु जी महाराज के चरणों में वंदन निवेदन किया। हमारे गीता परिवार के संस्थापक एवं लर्नगीता प्रकल्प के प्रेरक मार्गदर्शक तथा राम जन्मभूमि न्यास के कोषाध्यक्ष एवं कृष्ण -जन्मभूमि न्यास के उपाध्यक्ष परम श्रद्धेय स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज भी पधारें हैं। सन्तों की उपस्थिति तो साक्षात् आशीर्वाद स्वरूप होती है। गुरुजनों के स्वागत वंदन में संगमनेर महाराष्ट्र के ध्रुव ग्लोबल स्कूल के छात्र छात्राओं द्वारा सुंदर गुरु योग वंदना प्रस्तुत की गई।
आदरणीय संजय भैया ने लर्न गीता प्रकल्प की अद्भुत सफलता का श्रेय गीता परिवार के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आदरणीय डॉ. आशू भैया जो कि लखनऊ उत्तर प्रदेश में निवास करते हैं एवं बड़े उद्यमी भी हैं, को देते हुए उनका परिचय दिया।
आ. आशू भैया ने स्वामी जी महाराज एवं परम पूज्य सुधांशु जी महाराज के चरणों में वंदन निरुपित किया। आशू भैया ने बताया कि 1986 से 2020 तक अर्थात् लगभग 34 वर्षों तक गीता परिवार द्वारा गीता जी की ऑफलाइन कक्षाएं ली जाती थीं। किंतु संत कृपा कब किस रूप में हो जाये पता नहीं।
2019 नवम्बर-दिसम्बर में स्वामी जी का गीता परिवार के कार्यकर्ताओं को यह निर्देश हुआ कि गीता जी के प्रसार - प्रचार पर विशेष ध्यान देने का समय आ गया है उसी समय स्वामी जी ने ध्येय वाक्य दिया - 'घर घर गीता, हर कर गीता'। इस निर्देश के साथ ही वरिष्ठ गीतासेवियों ने योजना बनाने का कार्य आरंभ ही किया था कि कोविड की आपदा ने जीवन की गति को विराम देना प्रारंभ कर दिया, आपात स्थिति थी, सब कुछ थमने लगा था। चहुँ ओर नैराश्य एवं भय व्याप्त हो गया था तब स्वामी जी का पुन: निर्देश हुआ कि इस आपदा को चुनौती के रूप में लेना है गीता परिवार के इस कार्य को गति दीजिए।
संतों की कृपा होती है तो कार्य फलित होते हैं; आ. संजय भैया, आ. आशू भईया एवं गीता परिवार के वरिष्ठ सेवियों ने मिलकर योजना को मूर्त रूप देना प्रारंभ किया एवं कोविड काल में Learngeeta.com का आरंभ हुआ।
ऑनलाइन कक्षाओं का फॉर्मेट जिस प्रकार से तैयार
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किया गया था कि 500 - 700 साधक जुड़ेंगे किन्तु फॉर्म जब नामांकन हेतु WhatsApp, Facebook इत्यादि पर भेजे गये तो अनुमान से कहीं अधिक 2500 लोगों के नामांकन हो गये। उसके उपरांत तो यह यात्रा चल निकली, द्वितीय वर्ग में 4000, तृतीय में 7000 फिर 11000, 20000......और ये उत्तरोत्तर बढ़ती जाने लगी। संतों का संकल्प एवं भगवान की कृपा ही ऐसा अद्भुत कार्य करती है ।
पूज्य सुधांशु महाराज को संबोधित करते हुए आशू भैया ने कहा कि आज से प्रारंभ होने वाले 30वें बैच में आपके आशीर्वाद के साथ 82 देशों से 47000 से भी अधिक साधक 13 भाषाओं में सुबह 5 बजे से रात्रि 2 बजे तक 19 समय सत्रों में गीता जी सीखना प्रारंभ करेंगे। भैया ने कहा गीता पर भाष्य, टीकायें प्रवचन तो अनेकों संतों, महापुरुषों के उपलब्ध हैं किन्तु
इतने शुद्ध उच्चारण के साथ गीता जी पढ़ पाना इतना सुलभ कभी भी नहीं था वह भी पूर्णतः निःशुल्क। अब तक ज़ूम कक्षाओं में 180 देशों से 19 समय सत्रों पर 13 विभिन्न भाषाओं में अलग - अलग देशों से प्रांतों से के 8 लाख, 6 हजार, 932 साधक गीता जी सीख चुके हैं एवं अपने - अपने सुविधा जनक समय पर अपने - अपने स्थान पर सीख भी रहे हैं तथा यह अनवरत बढ़ते रहने वाला है ।
इस अवसर पर आशू भैया ने रामचरित मानस की चौपाई उद्धृत करते हुए कहा कि-
गरल सुधा रिपु करही मिताई
गोपद सिंधु अनल सितलाई
गरुड़ सुमेरू रेणू सम ताहि
राम कृपा करि चितवा जाहि
अर्थात् जिस पर राम जी की कृपा होती है उसके लिए समुद्र भी मीठा हो जाता है अग्नि भी शीतल हो जाती है एवं विष भी अमृत समान हो जाता है। आप पूज्य सुधांशु जी महाराज जो स्वयं ही सुधा के सागर स्वरूप हैं इस अमृतमय वातावरण में आपसे निवेदन है कि गीता के सभी साधकों को अपना आशीर्वाद प्रदान कीजिए।
भैया ने 82 देशों से जुड़ रहे साधकों को संबोधित करते हुए उनका हार्दिक स्वागत अभिनंदन एवं उत्साह वर्धन किया एवं साधकों की उत्सुकता के निवारण हेतु बताया कि कक्षाओं का स्वरूप कैसा होता है। आदरणीय संजय भैया ने आशू भैया का धन्यवाद करते हुए गीता प्रात्यक्षिक प्रारंभ किया। साधक गीता के श्लोक किस प्रकार कंठस्थ करते हैं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण प्रस्तुत करने हेतु भैया ने श्रद्धेय स्वामी जी से निवेदन किया कि वे साधकों से श्लोक पूछें।
अलवर राजस्थान से 39 वर्षीय गीताव्रती सोनिया विजय दीदी ने स्वामी जी द्वारा पूछे गए श्लोक सुनाये। गीताव्रती रिचा पटेल दीदी ने भी गीता प्रात्यक्षिक में श्लोकांक से पूछे गए श्लोक सुनाये। सुन्दर आश्चर्य रहा
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गीता पथिक की तैयारी कर रहीं 82 वर्षीय प्रेरणा दीदी मेहता, इन्हें 8 अध्याय कंठस्थ हैं एवं 12 अध्याय कंठस्थ करके पथिक की परीक्षा देने की तैयारी कर रही हैं। दीपक भैया अमेरिका से हैं इन्होंने श्लोक तो कंठस्थ किये ही हैं साथ में उनके अर्थ भी बता कर सभी को आनंदित कर दिया।
आज के शुभारम्भ समारोह में गीता विचक्षण साधकों का विशेष सम्मान किया गया। अब तक 86 साधकों ने श्लोकांक के साथ गीता जी कंठस्थ कर ली है एवं अब वे श्लोकार्थ कक्षामें प्रवेश ले चुके हैं। आदरणीय संजय भैया ने साधकों को परम सौभाग्यशाली बताया कि आज के सत्र में उन्हें आशीर्वाद देने हेतु परम पूज्य संत श्री सुधांशु जी महाराज भी विद्यमान हैं। पूज्य स्वामी श्री सुधांशु जी महाराज का परिचय देते हुए कहा कि वे विश्व जागृति मिशन के अंतर्गत विगत 31 वर्षों से भारत में 90 सेवा केंद्र चल रहे हैं, जिसमें कथायें सत्संग के अतिरिक्त कई प्रकार की सेवाएँ दी जाती हैं। संत के लक्षण होते हैं मानव सेवा।
सुधांशु जी महाराज के निर्देशन में फरीदाबाद में करुणा सिन्धु चिकित्सालय चलता है जिसका लाखों लोगों को लाभ हुआ है। इसके अतिरिक्त अनाथालय, वृद्धाश्रम, गौशाला इत्यादि देश विदेशों में वेद संस्कृति गुरुकुल के आप परिवाहक हैं। श्रद्धेय स्वामी गोविंददेव गिरिजी ने संत श्री सुधांशु जी महाराज के विश्व जागृति मिशन की प्रशंसा की एवं संत श्री से निवेदन किया कि वे अपनी मधुतुल्य वाणी से सभी साधकों को अपना अमूल्य आशीर्वाद देकर कृतार्थ कीजिए। पूज्य स्वामी जी ने संत श्री सुधांशु जी महाराज को बारम्बार प्रणाम निरुपित किये। उन्होंने कहा -
'सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया।'
इसी को चरितार्थ करता है यह श्लोक। हम सभी अत्यंत भाग्यशाली हैं कि हमारे देश में संत धार्मिक शिक्षा के साथ समाज की उत्तरोत्तर प्रगति हेतु भी कार्यशील हैं। परम श्रद्धेय स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज वेदों के ज्ञाता हैं एवं भारत में आपके 37 वेद गुरुकुल चल रहे हैं जिनमें छात्रों को वेद, उपनिषद, ब्रह्मसूत्र की शिक्षा के साथ साथ व्यावहारिक शिक्षा
भी दी जाती है। स्वामी जी वेद संस्कृति की पुनर्स्थापना हेतु निरंतर प्रयासरत हैं।
श्रद्धेय स्वामी जी ने गीता- परिवार के सभी कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए अनेक आशीर्वाद दिये आपने कहा कि गीता परिवार की सफलता का श्रेय सभी सेवी कार्यकर्ताओं को है जो सतत सेवा में लगे रहते हैं ये रुकना ही नहीं चाहते दिन-रात निरंतर सेवा हेतु तैयार रहते हैं। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि मैं अत्यंत दृढ़तापूर्वक कहना चाहता हूँ कि सभी कार्यकर्ता नम्रतापूर्वक सेवा में लगे रहते हैं इसलिए ऐसा लगता है कि यही कारण है कि भगवान
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श्रीकृष्ण की कृपा इस गीता प्रकल्प पर है।
आदरणीय आशू भैया ने परमश्रद्धेय स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज के अनुग्रह को साष्टांग प्रणिपात करते हुए कहा कि स्वामी जी का सूक्ष्म आशीर्वाद सदैव ही हमारे साथ रहता है जो हमें सहस्रों हाथियों का बल प्रदान करता है। गीता परिवार ने लर्न गीता कक्षाओं के साथ अन्यान्य सेवायें भी आरंभ की हैं जिसमें गीता मैत्री नामक षण्मासिक पत्रिका भी है।
आज के विशिष्ट समारोह में संत श्री सुधांशु जी महाराज की उपस्थिति में गीता मैत्री न्यूज़लैटर का प्रकाशन भी किया। आदरणीय आशू भैया ने बताया कि इस पत्रिका में "जुलाई 2023 से लेकर दिसम्बर 2023 तक" के विभिन्न कार्यक्रमों का उल्लेख है। जिसमें कि साधकों के आलेख, साधकों की विभिन्न गतिविधियाँ, गीता परिवार से जुड़ने के उपरांत साधकों के जीवन में आये अद्भुत परिवर्तन, कार्यक्रमों की प्रतिक्रियायें, विभिन्न भाषाओं में लेख-आलेख, गीता - प्रश्नोत्तरी, गीता-ज्ञान वर्ग पहेली इत्यादि प्रकाशित किये गये हैं।
साधकों हेतु श्रद्धेय स्वामी जी एवं आदरणीय संजय भैया के संदेश भी प्रकाशित किये गए हैं। आदरणीय आशू भैया ने बताया गीता परिवार द्वारा विभिन्न धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन किया जा रहा है। जिसमें 10 भाषाओं में सरल पठनीय गीता, त्रिरत्नीय गीता जिसमें गीता जी, श्रीविष्णुसहस्रनाम एवं श्रीरामरक्षा स्तोत्र इसप्रकार 25 पुस्तकें न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध करा रहे हैं।
श्रद्धेय स्वामी जी द्वारा प्रदत्त ध्येय वाक्य 'घर घर गीता, हर कर गीता' को सार्थक करने की ओर गीता परिवार का यह ३० वाँ वर्ग एक और सफल कदम हो गया ।
आदरणीय डॉ. आशू जी गोयल भैया ने योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रार्थना वंदन करते हुए परम पूज्य स्वामी जी एवं संत श्री सुधांशु जी महाराज के आशीर्वाद की अभिलाषा करते हुये साधकों को वर्ग के शुभारम्भ के अवसर पर अनेकानेक शुभकामनायें देते हुए आज का कार्यक्रम पूर्ण किया।





