
L1 Opening Ceremony
31st Batch - Mar24
01/03/24
1 मार्च 2024 को गीता जी के चार धाम की यात्रा के स्तर -1 का शुभारंभ समारोह आयोजित किया गया। सर्वप्रथम गीता परिवार के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आदरणीय डॉ. आशू गोयल जी ने साधकों को सम्बोधित किया। उन्होंने बताया कि लर्नगीता संथा विश्व की सबसे बड़ी गीतासंथा है। उन्होंने कहा कि यह हम सब पर भगवान की असीम कृपा है कि हम सब गीता कक्षा के लिए चुने गए हैं। हमनें गीता जी को नहीं चुना वरन् गीता जी ने हमें चुना है। महर्षि वेदव्यास जी लिखते हैं 'गीता सुगीता कर्तव्या, किमन्यै शास्त्र विस्तरैः' अर्थात् गीता सब ग्रंथों का सार है। जब सार प्राप्त हो जायें तो विस्तार की क्या आवश्यकता। भगवान गीता के 18वें अध्याय में कहते हैं:-
य इमं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति।
भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः॥
जो भी इस गीता शास्त्र को पढ़ेगा, श्रवण करेगा अथवा मेरे भक्तों को सुनाएगा वह मनुष्य मुझे ही प्राप्त होगा। आदरणीय आशू भैया ने गीता कक्षाओं की रूपरेखा के विषय में विस्तार से समझाया। गीता कक्षाओं में साधक सप्ताह में पांच दिन शुद्ध उच्चारण करना सीखते हैं तथा शनिवार व रविवार के दिन विवेचन सत्र आयोजित किये जाते हैं, जिसमें साधकों की शंकाओं का भी निवारण किया जाता है। साधक गीता श्लोक कण्ठस्थ कर जीवन में आत्मसात कर सकते हैं। मानव जीवन अनमोल है। मानव शरीर देवताओं को भी दुर्लभ हैं।
बड़े भाग मानुष तन पावा।
सुर दुर्लभ सब ग्रंथनि गावा।।
हमें भगवत्कृपा से मानव जीवन मिला है। आवश्यकता है जीवन का उद्धार करने की। जिसके लिए हम सब गीता परिवार में सम्मिलित हुए हैं। यहाँ विश्व के 195 देशों में से 180 देश गीता परिवार से जुड़ चुके हैं। प्रातः 5 बजे से रात्रि 2 बजे तक ऑनलाइन कक्षायें सुचारू रूप से चलती हैं। परमपूज्य गुरुदेव
स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज का उद्देश्य है "घर घर गीता, हर कर गीता" इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु 8000 से अधिक गीतासेवी निःस्वार्थ सेवा कार्य में आनंद की अनुभूति से सराबोर रहते हैं। आदरणीय आशू भैया ने बताया कि गीता पठन - पाठन की साम्रगी निःशुल्क प्रदान की जाती है। उन्होंने कक्षा में अनुशासन के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
इसके पश्चात् गीता प्रवीण सुश्री कविता वर्मा दीदी ने श्रीमती रेखा झंवर दीदी को योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण जी की प्रार्थना के लिए आमंत्रित किया। मधुर वाणी में प्रार्थना करके रेखा झंवर दीदी ने वातावरण को सकारात्मकता से भर दिया। प्रार्थना के पश्चात् ग्लोबल एकेडमी के छात्रों ने भगवान शंकराचार्य जी द्वारा रचित गुरु अष्टकम् स्तोत्र पर योगमय दीप प्रज्वलन की मनमोहक प्रस्तुति दी। जिसके बोल इस प्रकार हैं:-
शरीरं सुरुपं तथा वा कलत्रम्,
यशश्चारु चित्रं धनं मेरुतुल्यम्।
मनश्चैन लग्नम गुरोरङ्घ्रिपद्मे
ततः किं, ततः किं, ततः किं, ततः किम्॥
अर्थात् यदि यह मन गुरुचरणों में नहीं लगता है तो अन्य ऐश्वर्यों से क्या प्रयोजन।
इसके पश्चात् गीताव्रती व गीता विचक्षण प्रात्यक्षिक आमंत्रित किए गए। बेंगलुरु से चौदह वर्षीय गीताव्रती अर्जुन राव भैया ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया। मुंबई से 89 वर्षीय श्री रामचन्द्र कुलकर्णी जी ने उम्र के पड़ाव में गीताव्रती परीक्षा उत्तीर्ण कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। गीता विचक्षण अर्चना शर्मा दीदी ने तीन व पांच के पहाड़ा के क्रम से श्लोक सुनाकर अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया। जयपुर से दिव्यांग दीपिका मनधानिया दीदी जिन्हें वाणी की समस्या थी अब गीता अभ्यास से शुद्ध बोलने लगी हैं। गीता जी का शुद्ध उच्चारण व कंठस्थीकरण कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। दीदी अब गीता परिवार में कॉलिंग व माइग्रेशन की सेवाएं दे रही हैं। भगवत् कृपा से सबकुछ संभव है।
मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिम्।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्॥
समारोह में भगवत् स्वरूप विशेष अतिथि पूज्य स्वामी श्री जितेन्द्र नाथ महाराज जी ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि आज भगवान कृष्ण अवश्य प्रसन्न होगें। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में एवं देश में अन्य स्थलों पर कई वेद के विद्वानों को ऋग्वेद पूर्णतः कण्ठस्थ है और वे किसी भी अंतराल से बोल सकते हैं वही प्रतिभा आज इस मंच से साधकों में दिखाई दे रही है। परम पूज्य गुरुदेव स्वामी गोविंददेव गिरिजी ने आशीर्वचनों से सभी प्रात्यक्षिक देने वाले साधकों का उत्साहवर्धन किया।
आदरणीय आशू भैया ने परम पूज्य गुरुदेव स्वामी गोविंददेव गिरिजी के चरणों में वंदन करते हुए साधकों को सम्बोधित करने की प्रार्थना की। परम पूज्य गुरुदेव ने सर्व प्रथम प्रभु राम जी की वंदना की।
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥
परम पूज्य गुरुदेव स्वामी गोविंददेव गिरिजी ने
बताया कि हमारे देश का अमृतकाल उस दिन आया जिस दिन प्रभु रामलला जी की प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या में हुई। आज वातावरण परिवर्तित हो रहा है। पहले हम गीता जी के श्लोक वैदिकों से सुनते थे। आज जब गीता प्रशिक्षण में आ गई है तो देश का उत्थान निश्चित है। हम सौभाग्यशाली हैं कि भगवान कृष्ण ने इस शुभकार्य के लिए हमें चुना है। परम पूज्य जितेन्द्र नाथ महाराज जी का परिचय देते हुए बताया कि स्वामी जितेन्द्रनाथ जी जिस गद्दी पर पीठासीन है वह 600 वर्षों की पीठ परम्परा है। स्वामी जी ने मातृशक्ति को संगठित कर सुसंस्कृत करने का जो प्रण लिया है वह अपने आप में अद्भुत है। उन्होंने स्वामी जी से साधकों का मार्गदर्शन करने का अनुग्रह किया।
परमपूज्य स्वामी जितेन्द्र नाथ महाराज जी ने लर्न गीता संथा के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि गीता मात्र पढ़ने का नहीं अपितु जीवन परिवर्तन का मार्ग है। यह साधना है राष्ट्रोत्थान की, आत्मकल्याण की। गीता भगवान कृष्ण से प्रेम सम्बन्ध बनाने की विधि है। उन्होंने कहा कि राष्ट्ररक्षा की सेना तो सबने देखी है परन्तु आध्यात्मिक, सांस्कृतिक नीति मूल्यों व सिद्धांतो के रक्षण हेतु विराट सेना निर्माण करने वाले महान सेनापति गुरु गोविंददेव जी को मैं प्रणाम करता हूँ। जो ज्ञान भगवान कृष्ण ने अपनी मधुर वाणी से अर्जुन को दिया वही ज्ञान पूरे विश्व को देने के लिए भगवान ने परम पूज्य स्वामी श्री गोविंददेव गिरिजी को चुना है।
तत्पश्चात् आदरणीय सुवर्णा मालपाणी काकी जी ने अध्याय 12वें अध्याय के कुछ श्लोक अपनी मधुर वाणी में गाकर हम सब को अनुगृहीत कर दिया। इसके पश्चात् धन्यवाद ज्ञापन देकर समापन प्रार्थना व हनुमान चालीसा पाठ कर कार्यक्रम को विराम दिया गया।


