
एकादश हनुमत चिन्तन
(हनुमान जयन्ती के पावन अवसर पर एक विशेष सत्र)
गीता विशारद डॉ आशू जी गोयल
मंगलवार, 23 April 2024 सायं 7.30 बजे से
श्री हनुमान जी महाराज की जय। श्री गुरु चरण कमलेभ्यो नमः। अत्यन्त पावन अवसर है कि हम सभी एकत्र होकर हनुमान जयन्ती के अवसर पर हनुमान चालीसा के एकादश पाठ कर सके। हनुमान जी का यह पर्व हनुमान जयन्ती के रूप में मनाया जाता है। जयन्ती का अर्थ होता है जिसकी जय का कभी अन्त ही नहीं हो। जयन्ती कहना शास्त्रीय बात है।
हनुमान जी महाराज एकादश रूद्र हैं इसलिए आज उनके एकादश गुणों का चिन्तन करते हैं। ज्ञानेन्द्रियाँ और कर्मेन्द्रियाँ मिला कर दस इन्द्रियाँ होती हैं। ग्यारहवीं इन्द्रिय मन को माना जाता है और मन की गति सबसे तेज मानी जाती है लेकिन हनुमान जी महाराज की गति तो मन से भी तेज है।
रामचरितमानस में एक भी पात्र ऐसा नहीं जिसके भगवान भी ऋणी हों। लेकिन हनुमान जी के ऋणी तो भगवान राम और सीता माता भी हैं। भगवान राम कहते हैं-
सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं।
अर्थात् तुम्हारा ऋण मैं कभी नहीं चुका सकता।
बजरंग बली मेरी नाव चली, मेरी नाव को पार लगा देना।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।
अणिमा, महिमा, लघिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इशित्व तथा वशित्व ये आठ सिद्धियाँ तुम्हें प्राप्त ही नहीं हो गई अपितु तुम इसे देने वाले भी हो गए।
आज हनुमान चालीसा की एकादश चौपाइयों का चिन्तन करेंगे। गोस्वामी तुलसीदास जी जब हनुमान जी का चिन्तन करते हैं तो कहते हैं -
1. श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार।
हमने हनुमान चालीसा तो बहुत बार गाई है, लेकिन हममें से कितने लोगों ने चिन्तन किया है कि इसका अर्थ क्या है?
गुरु जी के चरण कमलों की रज से (निज मन मुकुर सुधार, मुकुर अर्थात् दर्पण) अपने मन के दर्पण को साफ कर लूँगा क्योंकि जब तक मन साफ नहीं होता तब तक परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती है।
“तोरा मन दर्पण कहलाए, भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाए।“
2. जय हनुमान ज्ञान गुण सागर हनुमान जी महाराज ज्ञान के सागर हैं। सागर में जल की थाह नहीं पाई जा

सकती। इसे मापा या गिना नहीं जा सकता।
ज्ञानी मनुष्य शान्त होता है और थोड़े से ज्ञान वाला मनुष्य बहुत बोलता है। इसके लिए एक और कथन प्रचलित है-
“थोथा चना बाजे घना।“
राम जी कहते हैं हनुमान तुम्हारे अन्दर इतना ज्ञान आया कहाँ से? कोई ऐसा वेद, पुराण, शास्त्र नहीं जो तुम्हें न आता हो। ज्ञान के सागर हैं हनुमान जी।
3. महाबीर बिक्रम बजरंगी। महावीर अर्थात् महावीर। विक्रम अर्थात् अतुलित बल वाले। बजरंगी अर्थात् वज्र के समान अङ्गों वाले अथवा जिसके अङ्ग वज्र के समान कठोर हों। बल का संग्रह करना चाहिए। स्वामी जी महाराज कहते हैं कि जिस गृहस्थ को बल नहीं उसे अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
4. कुमति निवार सुमति के संगी। हनुमान जी कुमति के साथ कभी नहीं आते हैं और सुमति के साथ रहते
हैं। यदि आपको आपके जीवन में हनुमान जी की कृपा का पता करना है तो ये देख लीजिएगा कि आपके मित्र कैसे हैं, कुमति वाले अधिक हैं या सुमति वाले।
कुमति का त्याग करना और सुमति का संग करना आवश्यक है।
5. विद्यावान गुनी अति चातुर विद्यावान होना ही पर्याप्त नहीं है, गुणी भी होना चाहिए अर्थात् गुणों का संचय भी करना चाहिए। विद्यावान और गुणी होने के साथ- साथ आपको चतुराई भी आनी चाहिए। कहाँ, कैसे और कितना अपने ज्ञान का उपयोग करना यह आना चाहिए।
(Where, How, How much)
6. राम काज करिबे को आतुर काम करना बड़ी बात नहीं है किन्तु काम करने के लिए कितने आतुर या तत्पर (passionate) हैं, यह महत्त्वपूर्ण है। जिसका मन भगवान में, भगवान के भक्तों की सेवा में लग जाए, उसका जीवन पवित्र हो जाता है।
7. राम चरित्र सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मन बसिया॥
हनुमान जी महाराज भगवान का चरित्र सुनते हुए कभी नहीं थकते हैं। बाल्मीकि जी और भगवान की वार्ता चल रही है। भगवान पूछते हैं कि मैं कहाँ रहूँ? बाल्मीकि जी उत्तर देते हैं-
जिन्ह के श्रवन समुद्र समाना। कथा तुम्हारि सुभग सरि नाना॥
भरहिं निरंतर होहिं न पूरे। तिन्ह के हिय तुम्ह कहुँ गृह रूरे॥
अर्थात् भगवान आप उनके हृदय में रहिए जिनके कान आपकी कथा सुनते हुए कभी नहीं थकते हैं। हनुमान जी ने यह बात समझ ली और जहाँ कहीं भी राम कथा होती है हनुमान जी महाराज पहले पहुँच जाते हैं।
8. दुर्गम काज जगत के जेते हनुमान जी से कोई भी कार्य दुर्गम नहीं। हनुमान जी भक्तों के लिए भी कठिन से कठिन कार्य कर सकते हैं। हनुमान जी ने एक छलाँग में सौ योजन समुद्र पार कर दिया था। उन्हें सुषेण वैद्य को लाने के लिए कहा तो वह पूरी वैद्यशाला ही ले आए थे। जब उन्हें संजीवनी बूटी लाने को कहा तो उन्होंने सोचा पता नहीं कितनी मात्रा में लगेगी तो वो पूरा पर्वत ही उठा कर ले आए। हनुमान जी महाराज के भक्तों के लिए भी कोई भी कार्य दुर्गम नहीं होता है।
9. होत न आज्ञा बिनु पैसारे। राम दुआरे तुम रखवारे॥
एक बार एक कार्यालय एक चपरासी था। वह दिनभर हनुमान चालीसा का पाठ करता रहता था। जब भी कोई साहब से मिलने आता वह पहले दस रूपये माँगता और तब साहब से मिलवाता। एक बार किसी ने उससे कहा कि तुम तो भक्त आदमी हो फिर भी ये रिश्वत लेते हो तो उसने कहा मैंने कोई गलत काम नहीं किया है ऐसा हनुमान चालीसा में लिखा है।
राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे।
उसने इसका अर्थ का अनर्थ कर दिया था। लेकिन सत्य बात यही है कि राम जी के हृदय में वही विराज सकता है जो हनुमान जी की भक्ति करता हो।
10. तुम रक्षक काहू को डरना बछड़ा खूँटे के बल पर उछलता है। एक बार हनुमान जी का खूंटा(सहारा) ले लिया फिर किसी का डर नहीं। कबीर दास जी से किसी ने कहा कि आपको डर नहीं लगता क्या? कबीर दास जी ने उत्तर दिया -
काल पकड़ चेला किया, भय के कतरे कान,
समरथ गुरु सर पर खड़े, किसको करूँ प्रणाम॥
गोस्वामी तुलसीदास जी हनुमान जी को कहते हैं - जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥ अर्थात् हनुमान जी महाराज सद्गुरु हैं।
11. तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुःख बिसरावै।
हनुमान जी का भजन करने से राम जी मिल जाते हैं। पूरे देश में हनुमान जी के मन्दिर अधिक हैं। राम जप से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं, हनुमान जी के प्रसन्न होने
से राम जी प्रसन्न हो जाते हैं। स्वामी जी का अनुग्रह आशीष
“बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता।
अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनूमत्स्मरणाद्भवेत्॥“
आज बहुत बड़े आनन्द का दिन है कि जहाँ हनुमानजी जी ने सौ योजन का समुद्र पार कर पहली बार उतरे और अपना पहला पग श्रीलंका में धरा, उस स्थान पर आज हम बैठे हैं और विशेष बात यह है कि पूज्य स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने एक अट्ठारह फीट ऊँची हनुमानजी की प्रतिमा की स्थापना की है। उसका पूजन आज मेरे हाथों हुआ। मेरे साथ पण्डित महेश नन्दी जी, गोपाल जी, डॉ प्रकाश सोमन जी और हनुमान जी भी रहे। हनुमान चालीसा का पठन कर रहे आप लोगों के दर्शन करने का अवसर हमें भी मिला।
अभी नई उपाधि देना कोई कठिन कार्य नहीं है, मानस मर्मज्ञ डॉ आशू गोयल जी ने राम जी पर जो बोला वह बहुत विशेष है। उनके आग्रह पर मुझे आज आप सभी से संवाद साधना पड़ा लेकिन बहुत अच्छा है। हनुमान जी की उपासना हमारे जीवन में इसी प्रकार निरन्तर आगे बढ़ती रहनी चाहिए और हनुमान जी की उपासना से ही वे सभी प्रकार के सद्गुण हमारे जीवन में आते हैं जिन सद्गुणों से अपना और सबका

कल्याण हो सकता है। इसलिए तो गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने हनुमान जी को “सकल गुण निधान” कहा जो उनके लिए अत्यन्त योग्य विशेषण है। हनुमानजी की आराधना से क्या-क्या प्राप्त होता है इन सब बातों पर मैं तो बहुत बार बात करता रहा हूँ और आगे भी करता रहूँगा।
आज मुझे लगता है कि हमने जो शतकोटि हनुमान चालीसा का जो सङ्कल्प लिया था उसे पुनः दोहराएँ। अभी अयोध्या जी में राम जी का मन्दिर पूरा नहीं बना है। हमारा सङ्कल्प मन्दिर पूरा बनने तक का है। उसमें हनुमान जी का अलग से एक मन्दिर बनने वाला है। हमें अपने अभियान में और अधिक तेजी लानी चाहिए। इस निमित्त से हनुमान जी की आराधना हमारे जीवन में चलती रहेगी।
मैंने आपसे हमेशा कहा है कि भगवद्गीता के हम उपासक हैं और भगवद्गीता में श्री कृष्ण भगवान उद्गाता हैं, अर्जुन श्रोता हैं लेकिन श्रीमद्भगवद्गीता जी के सारे गुण जिसमें दिखते हैं वह हनुमान जी महाराज ऊपर विराजमान हैं, तो यह त्रिकोण अपने ध्यान में लाना, इसका स्मरण करना और अपने सङ्कल्प को दोहराना। आज बहुत अच्छा लगा कि मैं आप सबके साथ संवाद साध सका।
I'd like to share something special with all of you. Today, we have the honor of welcoming a distinguished monk from Sri Lanka, our Buddhist friend Swami Ratna Maharaj. Swami Ratna Maharaj has been tirelessly working for the betterment of society and has a deep connection with Bharat. On this auspicious day of Hanuman Jayanti, I've invited him to share some inspiring words with us. Please give him your attention.
Swami Ratna Maharaj
I am Ratna Maha Tero from Sri Lanka, a Buddhist monk dedicated to Hindu-Buddhist reforms. We work together to understand and implement core principles, fostering a deeper heart-to-heart connection and understanding among people. Our goal is to uplift society by finding common ground in the teachings of Vedanta and Buddhist philosophy. These traditions offer
profound insights on overcoming delusion and unifying humanity. It has been a pleasure meeting Swami Maharaj recently. Through our conversations, I have learned about the rich traditions and stories of Ram and Sita that are preserved in the villages of Sri Lanka. Swami Maharaj mentioned the highest mountain in Sri Lanka, a beautiful place that I hope you all can visit some day.Thank you for your attention. Let us come together, heart to heart, with a clear message: May all beings be happy and healthy. Thank you very much.
शतकोटि हनुमान चालीसा के महायज्ञ में अपनी आहुति देने के लिए गूगल प्ले स्टोर से राम प्रतिष्ठा एप डाउनलोड कर सकते हैं।
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पूज्य स्वामी जी श्री गोविन्द देवगिरि जी महाराज के व्हाट्सएप चैनल के माध्यम से आप उनके प्रवचन सुन सकते हैं और उनके विभिन्न कार्यक्रमों को लाइव देख सकते हैं। व्हाट्सएप चैनल का लिंक:
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॥ॐ श्रीकृष्णार्पणमस्तु॥





