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मीठी बात (आशू भैया के साथ...)नववर्ष के प्रथम पर्व मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आदरणीय आशू भैयाजी के साथ एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बाल सखा विराट चौहान भैया द्वारा मधुर वाणी में प्रार्थना से किया गया।
अनुद्वेगताअनुद्वेगता शब्द सामान्य व्यवहार में प्रचलित नहीं है, तथापि श्रीमद्भगवद्गीता में यह शब्द तीन बार प्रयुक्त हुआ है। द्वितीय अध्याय में श्रीभगवान कहते हैं -गीता विशारद डॉ आशू जी गोयल
एकादश हनुमत चिन्तनश्री हनुमान जी महाराज की जय। श्री गुरु चरण कमलेभ्यो नमः। अत्यन्त पावन अवसर है कि हम सभी एकत्र होकर हनुमान जयन्ती के अवसर पर हनुमान चालीसा के एकादश पाठ कर सके।गीता विशारद डॉ आशू जी गोयल
मेरे रामदीप प्रज्वलन एवं पावन भिक्षा के सुमधुर गायन के साथ रामनवमी का विशेष विवेचन सत्र "मेरे राम" का शुभारंभ हुआ।ऐस
ऐसी वाणी बोलियेभगवान की अतिशय मङ्गलकृपा से हम सबका ऐसा सद्भाग्य जाग्रत हुआ कि हम लोग अपने जीवन में श्रीमद्भगवद्गीता सीखने के साथ, इस महत् कार्य में गीतासेवी बनकर प्रवृत्त हो गये हैं। हममें यह आकॉंक्षा जगी कि हम अपने व्यक्तित्व को सतत निखारते चले जाएं।गीता विशारद डॉ. आशू जी गोयल


